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नायलॉन चाइनीज डोर और मांजा डोर की बिक्री, भंडारण और बिक्रीउपयोग पर प्रतिबंध

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मानसा, 05 फरवरी:

अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट श्री निर्मल ओसेपचन ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के मद्देनजर दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 144 के तहत शक्तियों का उपयोग करते हुए, पतंग/गुड़िया उड़ाने के लिए नायलॉन से बनी चीनी डोर का उपयोग करने का आदेश दिया। जिला मानसा की सीमा के अंतर्गत आने वाले पुलिस थाना क्षेत्रों में मांजा डोर (कांच के पाउडर से लेपित धागे) की बिक्री, भंडारण और उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह प्रतिबंध थ्रेडेड डोर पर लागू नहीं होगा।
उन्होंने आदेश में कहा कि आजकल पतंग/गुड़िया उड़ाने के लिए प्रयोग किये जा रहे दरवाजे सूती दरवाजे से बदलकर चाइनीज दरवाजे और नायलॉन के मांजा दरवाजे बन गये हैं। उन्होंने बताया कि पतंग उड़ाने के दौरान यह दरवाजा पतंग/गुड़िया उड़ाने वालों के हाथ और उंगलियां काट देता है। उन्होंने कहा कि साइकिल एवं स्कूटर चालकों के गले एवं कान कटने, उड़ते पक्षियों के फंसने एवं उनकी मृत्यु/घायल होने की घटनाएं भी हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा दरवाजे में फंसे पक्षियों के मरने के बाद उनके पेड़ों पर लटकने से भी पर्यावरण प्रदूषित होता है. उन्होंने बताया कि इस तरह से चाइनीज डोर और नायलॉन से बने मांजे का उपयोग पतंग उड़ाने के लिए किया जाता है तो यह मानव जीवन और पक्षियों के लिए घातक साबित होता है. इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए पतंगों के उपयोग के लिए नायलॉन निर्मित चाइनीज डोर और मांझा डोर की बिक्री, भंडारण और उपयोग को रोकने के लिए उपाय करने की तत्काल आवश्यकता है।यह आदेश 31 मार्च 2024 तक लागू रहेगा।

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