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स्थानीय स्तर पर रोज़गार सृजन करने की तरफ महत्वपूर्ण कदम

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चंडीगढ़, 24 जनवरी

वन और वन्य जीव सुरक्षा मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने आज राज्य के वैटलैंडज़ में इको टूरिज्म को उत्साहित करने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुये कहा कि इससे स्थानीय स्तर पर रोज़गार के मौके पैदा होंगे। 

आज सैक्टर-68 स्थित वन कंपलैक्स में पंजाब राज्य वैटलैंडज़ अथॉरिटी की मीटिंग की अध्यक्षता करते हुये मंत्री ने वातावरण संतुलन को कायम रखने के लिए वैटलैंडज़ के विकास को महत्वपूर्ण कदम बताया। इसके इलावा मंत्री ने विभाग के अधिकारियों को वन क्षेत्रों में माइनिंग पर सख़्ती से नकेल कसने के भी निर्देश भी दिए। 

मंत्री को आगे बताया गया कि जैविक विभिन्नता को उत्साहित करने के साथ-साथ वैटलैंडज़ को बचाने के लिए चलाई गई वैटलैंडज़ बचाओ मुहिम के हिस्से के तौर पर, पंजाब में 1381 वैटलैंडज़ की पहचान की गई है, जिनमें से 414 कुदरती और 967 मानव द्वारा बनाऐ गए हैं और हरेक वैटलैंड के अधीन 2.25 हेक्टेयर क्षेत्रफल आता है। इसके इलावा, तकरीबन 2300 वैटलैंड मित्र ( वालंटियर) वैटलैंडज़ की संभाल के लिए काम कर रहे हैं और लोगों को वैटलैंडज़ को सुरक्षित रखने की ज़रूरत और उनके वातावरण महत्व के बारे अवगत करवाने के लिए जागरूकता प्रोग्राम भी करवाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, राज्य में वैटलैंडज़ की संभाल के लिए डब्ल्यू. डब्ल्यू. एफ. इंडिया, पंजाब रिमोट सेंसिंग सैंटर पी. ए. यू. लुधियाना, गुरू नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर, गुरू अंगद देव यूनिवर्सिटी आफ वैटरनरी एंड एनिमल सायंसज़ ( लुधियाना) और पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ( पीपीसीबी) के साथ सहयोग किया गया है। 

इसके इलावा मंत्री के ध्यान में यह भी लाया गया कि केंद्रीय वातावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पंजाब के 7 वैटलैंडज़ रणजीत सागर डैम कंजरवेशन रिज़र्व, ब्यास रिवर कंजरवेशन रिज़र्व, कांजली वैटलैंड, हरीके वैटलैंड, रोपड़ वैटलैंड कंजरवेशन रिज़र्व, नंगल वैटलैंड और केशोपुर-मियानी वैटलैंड के आसपास 100 मीटर के क्षेत्र को जोन आफ इनूफैऐंस के क्षेत्र के तौर पर घोषित करने के विभाग के प्रस्ताव को स्वीकृत कर लिया है। इसका मतलब है कि इन क्षेत्रों में कोई भी गतिविधि राज्य के वन विभाग की अनुमति के बाद ही की जा सकेगी। 

मंत्री ने इस साल फरवरी महीने केशोपुर छम्ब में 5वें स्टेट बर्ड फेस्टिवल करवाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। 

इस मौके पर उनके साथ वित्त कमिश्नर (वन) विकास गर्ग, पी. सी. सी. एफ. आर. के. मिश्रा, चीफ़ वाइल्ड लाईफ़ वार्डन धर्मेंद्र शर्मा और अन्य सीनियर अधिकारी मौजूद थे।

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