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मीडियाई आतंक पर बोलो प्रेस क्लब अध्यक्ष परवीन कोमल

अपने आप को पटियाला का तरुण तेजपाल समझने वाले चढ़े पुलिस के हत्थे 

पटियाला (पी एन टी न्यूज़ डेस्क ) : हरियाणा के एक डॉक्टर को ब्लैकमेल करके पांच लाख की रंगदारी की मांग करके दो लाख रुपये वसूलने वाले 5 महानुभाव आज जेल यात्रा के पथ पर रवाना हो गए हैं । आज आपसे कुछ विचार सांझा करते हैं । 1984 में मैने पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा तो उस समय पत्रकारिता आसान नहीं थी । पंजाब के हालात आतंकवाद की वजह से धीरे धीरे बिगड़ते जा रहे थे ।

तब मैंने पंजाबी ट्रिब्यून ज्वाइन किया । बड़ा अखबार था । अखबार के नाम और मेरे दोस्ती के दायरे ने जल्द ही मेरी जान पहचान का दायरा काफी बड़ा कर दिया । तब अगर पत्रकारों में आपसी भेदभाव था तो केवल छोटे बड़े अखबार को लेकर । तब पत्रकार को ज्यादा कमाई नही होती थी . अखबार 8 रुपये कालम के लिहाज से अदायगी करते थे और सप्लीमेंट निकालने पर 15 से 20 प्रतिशत कमीशन दिया जाता था । तब दो तीन लाख रुपये का सप्लीमेंट निकालना बहुत बड़ी बात मानी जाती थी लेकिन मैंने अपनी दोस्ती के दायरे का लाभ उठाकर विशेष सप्लिमेंटों के ये टारगेट आसानी से पूरे किए । ऐसे ही मेरे और साथी पत्रकार भी उस जमाने मे करते थे ।

पंजाब की मालवा जर्नलिस्ट एसोसिएशन भी तब रजिस्टर्ड हुई जिसका मैं कर्मानुसार महासचिव और अध्यक्ष चुना गया ।शुक्र है उस परमात्मा का कि उस दौर में कभी भी मेरे और मेरे साथियों के दामन में दाग नही लगा । तब डॉक्टर भी होते थे और हस्पताल भी । लेकिन जैसे मीडियाई आतंक का तहलका अब मच रहा है वैसा आज तक हमने नहीं देखा ।

पटियाला में वैसे तो कुछ और कलमी लुटेरे भी हैं जो कुछ डाक्टरों को धौंस दिखा कर अपनी जेब फुलाने में माहिर हैं लेकिन हरियाणा में धर दबोचे गए पीले पत्रकारों ने पहले भी पुलिस की आव भगत ग्रहण करने के ऐसे करिश्मे किये हैं । पत्रकारिता हम भी करते हैं लेकिन ऐसी लग्ज़री गाड़ियां और ऐशो इशरत का सम्मान शायद इतनी जल्दी हमारी किस्मत में नहीं लिखा अल्लाह मियां ने । ये एक गैंग के रूप में कार्य करते थे और इनका मकसद ख़बर प्रकाशित करना नहीं था , ये तो रातो रात अमीर होने के लिए शिकार की तलाश में रहते थे और अक्सर जाल बिछाते रहते थे । ये जीरो से शुरू हुए थे और लग्जरी गाड़ियों तक जा पहुंचे थे ।

प्रेस क्लब पटियाला का प्रेजिडेंट होने के नाते मुझे इनकी शिकायत मिली थी और मैने इन्हें चेतावनी भी दी थी कि औकात से ज्यादा बड़ा मुंह खोलने से जबड़ा टूटने का डर रहता है लेकिन इनके दिमाग में भूसा इस हद तक भरा था कि ये अपने आप को पटियाला का तरुण तेजपाल समझने की भूल कर बैठे और हरियाणा में भी तहलका मचाने के चक्कर में एक अर्धशिक्षित गोरी मैम के साथ लाल टोपी वालों के हत्थे चढ़ गए ।

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