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नोटबन्दी, मोदी या जेटली के दिमाग से निकला फैसला नहीं यह तो सिर्फ चेहरा हैं।

असल गेम प्लान तो किसी और का

पटियाला (पी एन टी ब्युरो): नोटबंदी शुरू होने के बाद से ही प्रधानमंत्री नरेंद मोदी की भारत की इकनॉमी को कैश लेस बनाने की योजना का विशेषज्ञों दोबारा विश्लेषण किया जा रहा है. इसके फ़ायदे और नुक़सान के बारे में तरह तरह के तर्क दिए जा रहे है. लोग सोशल मीडिया पर तरह तरह की पोस्ट डाल कर लोगों तक अपनी बात पहुँचाने की कोशिश कर रहे है. भारत के एक तबके का मानना है कि मोदी जी बड़ी बड़ी कम्पनीयों को फ़ायदा पहुँचाने के लिए ये सब कर रहे है और ये काफ़ी हद तक सही भी लगता है. पटियाला से डॉक्टर विकास जैन ने भी कुछ तर्क दिए है जो सोशल मीडिया में काफ़ी वायरल हो रहे है.

जानिए क्या है वह तर्क–

क्या आपको अंदाजा है हम पर जो कैश लेस इकनॉमी थोपी जा रही है उसका फायदा किसको और कितना होने वाला है ? नहीं है तो इस पोस्ट को ध्यान से पढ़िए और विचार कीजिये कि कथनी और करनी में कितना फर्क है !

तथ्य नंबर-1
जब भी आप डेबिट कार्ड से कोई आर्थिक व्यवहार करते हैं तो बैंक रिटेलर या जिसको पैसे का भुगतान किया गया है उससे 0.5 से लेकर 1% तक कमीशन लेते हैं।

तथ्य नंबर -2
क्रेडिट कार्ड कंपनियां और बैंक क्रेडिट कार्ड से होने वाले हर आर्थिक व्यवहार (ट्रांजेक्शन) पर 1.5 % से लेकर 2.5% तक दलाली लेती है । यह दलाली दुकानदार यानी भुगतान लेने वाले से वसूली जाती है।

तथ्य नंबर -3
पे टी एम, फ़्रीरिचार्ज, जीयो मनी और इन जैसी दूसरी ई- वॉलेट कम्पनियां 2.5% से 3.5% तक दलाली लेती है. जब हम अपने मेहनत की कमाई अपने बैंक अकाउंट से ई- वॉलेट में ट्रांसफर करते हैं।

तथ्य नंबर -4
आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक हर महीने 2.25 लाख करोड़ और हर साल करीब 25 से 30 लाख करोड़ रुपये पूरे देश में ATM मशीनों से निकाले जाते हैं। अगर बैंकों से होने वाले विड्राल को भी इसमें जोड़ दिया जाए तो (ATM+ बैंक) से निकलने वाली यह राशि होती है करीब 75 लाख करोड़। चूंकि इस राशि का सारा लेनदेन बैंक से होता है इसलिए यह सारा पैसा 1 नंबर का सफेद धन होता है।

तथ्य नंबर -5
वर्तमान में कुल आर्थिक व्यवहार का केवल 3 % आर्थिक व्यवहार इलेक्ट्रॉनिक तरीके से होता है।

तथ्य नंबर -6
अगर 1 नंबर में हुए 75 लाख करोड़ के आर्थिक व्यवहार को कैश लेस कर देंगे तो क्या होगा ? पे टी एम, फ़्रीरिचार्ज, जीयो मनी और इन जैसी दूसरी ई- वॉलेट कंपनियों की चांदी हो जायेगी।

कैसे होगी ? तो जानिए ऐसे होगी…

75 लाख करोड़ के कैशलैस आर्थिक व्यवहार पर अगर यह निजी कंपनियां औसतन 2% भी कमीशन पाती हैं तो सीधे-सीधे हर साल डेढ़ लाख करोड़ रुपया इन कंपनियों को मिलेगा। बिना कुछ किये धरे। पैसा जनता का, माल व्यापारी का और ये कंपनियां मुफ्त में माल उड़ाएंगी ! सरकार ऐसे देगी सफाई सरकार कहेगी मत यूज करो E-WELLET हम आपको फ्री में UPI app उपलब्ध करा रहे हैं। यह सरकारी है। एकदम फ्री है। इसके जरिये भुगतान करो। अच्छी बात है। लेकिन जरा सोचिए पिछले कई सालों से काम कर रहे रेलवे रिजर्वेशन के सरकारी सर्वर की क्या स्पीड है? इसी स्पीड में UPI का सर्वर भी चलेगा या फिर Paytm/Freecharge/ Jio Money और इन जैसी दूसरी E-wallets कंपनियां इसकी स्पीड बढ़ने नहीं देंगी। इतिहास गवाह है सरकारी विमान कंपनी एयर इंडिया की कमर बीजेपी वाले प्रमोद महाजन की करीबी जेट ने तोड़ी। BSNL और MTNL को कौन अपनी मुट्ठी में कर लिया है। इसलिए यह मत कहना की UPI यूज करो। जब UPI से स्पीड में पेमेंट नहीं होगा तो लोग वापस Paytm/Freecharge/ Jio Money और इन जैसी दूसरी E-wallets कंपनियों पर आश्रित हो जाएंगे। डेढ़ लाख करोड़ रुपये सालाना का यह एक खुल्लमखुल्ला घोटाला है। सरकार, Paytm/Freecharge/ Jio Money और इन जैसी दूसरी E-wallets कॉर्पोरेट कंपनियों और बैंकों की इसमें मिली भगत है। अब समझ में आ रहा है कि कालाधन के नाम पर नोट बन्दी का फैसला कालाधन चलाने वाले कॉर्पोरेट को उपकृत करने के लिए लिया गया है। 2014 के चुनाव में कॉर्पोरेट ने बीजेपी पर जो निवेश किया था यह उसका रिटर्न है। सारा गेम प्लान है. जैसे- जैसे नोट बन्दी की परतें उघड़ रहीं है कई बातें समझ में आने लगी हैं। मसलन नोट बन्दी, मोदी या जेटली के दिमाग से निकला फैसला नहीं है, क्योंकि इनके पास इतना गूढ़ डेढ़ लाख करोड़ सालाना कमाने का आइडिया सोचने वाला दिमाग है ही नहीं। यह तो सिर्फ चेहरा हैं। असल गेम प्लान तो किसी और ने करोड़ों रुपये खर्च करके, टॉप चार्टड अकाउंटेंट, बैंकर और वित्त विशेषज्ञों से तैयार करवाया है। सरकार तो सिर्फ इस रेडीमेड प्लान को ढो रही है।

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