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मेटाबॉलिज्म की सुस्ती भगाएं, चुस्ती पाएं

बातें जो मेटाबॉलिज्म पर डालती हैं असर

बढ़ते वजन पर काबू पाने में असफल होने पर हम कई बार शरीर के धीमे मेटाबॉलिज्म को दोष देने लगते हैं। यह सच है कि हमारे वजन और मेटाबॉलिज्म में संबंध है, पर मोटापे का कारण मेटाबॉलिज्म नहीं है। हमारी अस्वस्थ और अनियमित दिनचर्या के कारण शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, जिसके लक्षण मोटापे के तौर पर दिखते हैं। यही बात सर्दियों पर भी लागू होती है। सर्दियों में शरीर को ज्यादा गर्मी की जरूरत पड़ती है। भूख तेज लगती है, डाइट बढ़ जाती है, लेकिन शरीर की सक्रियता घट जाती है। मेटाबॉलिज्म खुद से सुस्त नहीं हो जाता। हमारी दिनचर्या के सुस्त होने से मेटाबॉलिज्म की दर धीमी हो जाती है।

क्या है मेटाबॉलिज्म
हम जो खाते-पीते हैं, उसको पचाकर ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया मेटाबॉलिज्म है। सामान्य शब्दों में यह वह प्रक्रिया है, जो कैलरी को ऊर्जा में बदल देती है। हमारे शरीर को हर समय ऊर्जा की जरूरत होती है। शरीर में मेटाबॉलिज्म की प्रक्रिया 24 घंटे चलती रहती है।  उस वक्त भी, जब हम आराम की मुद्रा में होते हैं। सोते समय शरीर की आंतरिक क्रियाओं जैसे रक्त संचार, सांस लेने, कोशिकाओं की मरम्मत आदि के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है।
मेटाबॉलिज्म दो तरह का होता है। बीएमआर (बेसल मेटाबॉलिक रेट) और आरएमआर (रेस्टिंग मेटाबॉलिक रेट)। आराम की मुद्रा में भी हमारा शरीर ऊर्जा की खपत कर रहा होता है। हम दिनभर में जितनी कैलरी का सेवन करते हैं, उसके 75 फीसदी की खपत आरएमआर करता है। शेष कैलरी पाचन एवं अन्य शारीरिक गतिविधियों के लिए होती है। अब सवाल आता है कि कितनी कैलरी की जरूरत होती है? सामान्य तौर पर आरएमआर के लिए एक वयस्क महिला को दिनभर में 1200 कैलरी की जरूरत होती है। वहीं 200-400 अतिरिक्त कैलरी रोजाना की शारीरिक गतिविधियों के लिए जरूरी होती है।
उधर पुरुषों के लिए 1300 कैलरी आरएमआर के लिए जरूरी होती हैं। शारीरिक गतिविधियों के लिए उन्हें अतिरिक्त 1400-1600 कैलरी की जरूरत होती है। हालांकि, शारीरिक गतिविधियों को देखते हुए सबकी यह जरूरत अलग-अलग भी हो सकती है। जितनी कैलरी की खपत हमारा शरीर नहीं कर पाता, वह वसा के रूप में शरीर के विभिन्न हिस्सों पर जमा होने लगती है, जिसे मोटापा कहा जाता है।
मेटाबॉलिज्म अगर ज्यादा या कम होता है तो उसका असर शरीर के वजन पर दिखता है। मेटाबॉलिज्म कम होने पर शरीर का वजन एक जगह पर आकर ठहर सकता है। मेटाबॉलिज्म के साथ-साथ एक चीज और है कैटाबॉलिक रेट। कैटाबॉलिक दर बढ़ने पर वजन कम होने लगता है।

बातें जो मेटाबॉलिज्म पर डालती हैं असर 
0 सुबह मेटाबॉलिज्म तेज होता है। दिनचर्या व्यस्त होने के कारण ऊर्जा की जरूरत व खपत तेजी से होते हैं। तभी सुबह पौष्टिक नाश्ता जरूरी बताया जाता है। शाम में हमारी गतिविधियां घट जाती हंै, इसलिए मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। तभी शाम को हल्का खाने को कहा जाता है।
0 सुबह का नाश्ता ना करना भी सेहत के लिए अच्छा नहीं है।  सीधे दोपहर में भोजन करना मेटाबॉलिज्म पर बुरा असर डालता है। सुबह उठने के डेढ़ से दो घंटे के भीतर हमारे लिए कुछ पौष्टिक खाना जरूरी होता है। सुबह सही समय पर नाश्ता करने के बाद  दोपहर व शाम के समय का भोजन भी सही समय पर हो जाता है।  खान-पान में नियमितता मेटाबॉलिज्म पर अच्छा असर डालती है।
0 महिलाओं का मेटाबॉलिज्म पुरुषों के मुकाबले कम होता है।  माहवारी के चार-पांच दिनों में अमूमन महिलाएं ठीक से आहार नहीं लेतीं। कई बार शारीरिक सक्रियता घट जाती है। चार-पांच दिन के अंतराल पर हुई खान-पान की अनियमितता मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देती है। इसके अलावा सुबह के नाश्ते में लापरवाही के मामले भी महिलाओं में अधिक देखने को मिलते हैं।
0 मेटाबॉलिज्म सिर्फ पौष्टिक खान-पान से नहीं बढ़ाया जा सकता। नियमित व्यायाम अतिरिक्त ऊर्जा की खपत व मेटाबॉलिज्म को सही रखने में मदद करता है।
0 भोजन को छोटे कणों व उसके बाद ऊर्जा में बदलने के लिए पानी की जरूरत होती है। अगर बॉडी थोड़ी भी डिहाइड्रेट होगी तो मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाएगा। इसके लिए ताजे फल और सब्जियों को खाने में शामिल करें। मधुमेह या हृदय रोग से पीड़ितों को इस संबंध में डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

थाइरॉएड और विटामिन-डी की कराएं जांच 
हार्मोन्स में होने वाले बदलाव भी मेटाबॉलिज्म को धीमा कर सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि डॉक्टरी जांच से जाना जाए कि थाइरॉएड हार्मोन्स ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं। थाइरॉएड ग्रंथि के असक्रिय या धीमी गति से काम करने के कारण भी शारीरिक सक्रियता घटती है, जो मेटाबॉलिज्म को सुस्त कर देती है। विटामिन डी की कमी होने से भी वजन धीमी रफ्तार से कम होता है। अन्य हार्मोन्स में भी गड़बड़ी आ जाती है। विटामिन डी की जांच कराएं।

क्रैश डाइट 
कई बार हम वजन कम करने के लिए लो-कैलरी डाइट लेने लगते हैं। ऐसे में अनजाने ही उस कैलरी इनटेक में भी कटौती कर देते हैं, जो शरीर को रोजाना चाहिए होती है। कई बार वसा तो शरीर से कम नहीं होती, पर मांसपेशियों पर बुरा असर होने लगता है। लंबे समय बाद सेहत पर इसके बुरे असर दिखाई देने लगते हैं। मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, वह अलग। आप जरूरी कैलरी में कटौती किए बिना भी मेटाबॉलिज्म की दर को सही बनाए रख सकते हैं। सेहतमंद तरीके से वजन को कम करें। अगर एक महिला दिनभर में 1200 से कम और पुरुष 1800 से कम कैलरी का सेवन कर रहे हैं तो वह मेटाबॉलिज्म के सुधरने की उम्मीद न करें। अस्थाई तौर पर बेशक इससे वजन कम होगा, लेकिन मेटाबॉलिज्म की भी हानि होगी। शरीर पर बुरा असर दिखाई देने लगेगा। इससे मांसपेशियों के द्रव्यमान में कमी आएगी, वसा में नहीं। आगे चलकर आपका शरीर कम कैलरी की खपत करेगा और मोटापा घेरने  लगेगा।

उम्र का भी होता है असर 
उम्र बढ़ने के साथ भी मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। 25 साल की उम्र के बाद हर एक दशक में बीएमआर और आरएमआर में कुछ गिरावट होती है, पर व्यायाम करके आप इसके असर को काबू में रख सकते हैं। यह भी देखने को मिलता है कि 40 के बाद , इस डर से कि हड्डी और मांसपेशियां चोटिल ना हों, हम हल्का व्यायाम करने लगते हैं, लेकिन यह धारणा गलत है।
कुछ लोग उम्र बढ़ने के साथ डाइट भी कम कर देते हैं। जबकि शरीर स्वस्थ है और पूरी तरह सक्रिय रहते हैं तो खाने की मात्रा कम करना मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देता है। हर उम्र में शरीर को डाइट व व्यायाम में एक संतुलन बनाए रखना होता है।

न करें ये गलतियां
प्रोटीन की कमी :
 विशेषज्ञ कहते हैं कि प्रोटीन की  सही मात्रा बहुत जरूरी है। प्रोटीन की कमी मेटाबॉलिज्म को धीमा कर सकती है। दरअसल प्रोटीन को पचने के लिए ज्यादा ऊर्जा की आवश्यकता होती है। अन्य श्रेणी के खानपान के मुकाबले प्रोटीनयुक्त खाने को पचाने में शरीर को दोहरी मेहनत करनी पड़ती है। मेटाबॉलिज्म बढ़ाना चाहते हैं तो प्रोटीन इनटेक बढ़ाएं। इसके लिए टोफू, नट्स, अंडा, मछली, दाल और डेयरी प्रोडक्ट अच्छा विकल्प हैं।
व्यायाम : शारीरिक गतिविधियों की कमी न करें।   अनियमित व्यायाम भी मेटाबॉलिज्म को धीमा कर सकता है। मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने के लिए शारीरिक रूप से सक्रिय रहना सबसे प्रभावी है। इससे नई कोशिकाओं का निर्माण होता है, मांसपेशियां बनती हैं, जो आपके आरएमआर को हाई करता है।
तनाव : तनाव मेटाबॉलिज्म को तो धीमा करता ही है, सेहत को और भी कई तरह से नुकसान पहुंचाता है।
नींद की कमी : अधूरी नींद मेटाबॉलिज्म के लिए नुकसानदेह है। सात घंटे से कम की नींद शरीर और मेटाबॉलिज्म दोनों के लिए अच्छी नहीं है। हमारा शरीर दिनभर में जितनी कैलरी की खपत करता है, कम नींद उस संख्या को घटा सकती है। द अमेरिकन जरनल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन में आए 2011 के एक अध्ययन के अनुसार, नींद की कमी वजन बढ़ने का कारण बन सकती है।  इससे जंक फूड या रात में देर तक खाने की प्रवृति बढ़ती है। साथ ही कैलरी की खपत दर भी कम होती है।
नाश्ता न करना: सुबह नाश्ता न करने की आदत मेटाबॉलिज्म के लिए सबसे बड़ा खतरा है। दिनभर लिए जाने वाले किसी भी भोजन के बीच लंबा अंतराल नहीं होना चाहिए। हर दो-तीन घंटे के बाद छोटे-छोटे मील लेने चाहिए। खाने के बीच में लंबा अंतराल आपके शरीर को स्टार्वेशन यानी सुप्तावस्था में पहुंचा देता है। यह आदत मेटाबॉलिज्म को धीमा करती है। हृदय व पाचन-तंत्र पर भी बुरा असर पड़ता है।

कैसे बेहतर बनाएं मेटाबॉलिज्म
0 दिनचर्या को नियमित करें। सुबह उठने का एक समय रखें। उठने के डेढ़ से दो घंटे के भीतर पौष्टिक नाश्ता करें। चाय-कॉफी से दिन की शुरुआत कतई न करें। गुनगुने पानी या नीबू पानी व शहद लें।
0 नियमित 30 से 45 मिनट शारीरिक व्यायाम करें। ’अधिक तले-भुने, चिकनाई व मसालेदार  खाने से परहेज रखें। सलाद, दाल, अखरोट, मौसमी सब्जियां व डेयरी प्रोडक्ट लें। बादाम भी फायदा पहुंचाते हैं।
0 दिनभर में पांच से छह बार कम मात्रा में खाएं। बहुत मीठे से परहेज करें।
0 खाने में पर्याप्त फाइबर लें। एक वयस्क को दिन में 35-40 ग्राम फाइबर रोजाना लेना चाहिए।
0 दालचीनी, सेब, दलिया,दाल, दही एवं अन्य डेयरी फूड का नियमित सेवन पाचन-तंत्र दुरुस्त रखता है।

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