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भारतीय रेल – नाम बड़ा और दर्शन छोटे

Report By : Parveen Komal

Report By : Parveen Komal

मरीज मरता है मरे चिकित्सा सुविधा नहीं मिलेगी ?

चंडीगढ़ ( पी एन टी न्यूज़ डेस्क ) : बी जे पी सरकार के रेल मंत्री सुरेश प्रभु द्वारा ट्विटर मैसेज मिलने पर दूध या भोजन भेजने जैसे दावे करते हुए अक्सर अपनी पीठ खूब थपथपाई जाती है लेकिन रेल के सारे दावो की तब पोल खुली जब MP से अकेले गाडी मे सफर कर रही मृगाकक्षी पांडे नाम की महिला की तबीयत गंभीर रूप से खराब हो गयी. PNR 8361791828 के तहत गाड़ी संख्या 15206 में सफर कर रही असहाय महिला द्वारा रेल्वे के मेडिसिन हेल्प लाईन नम्बर पर हैल्प के लिए कई बार कॉल की गयी ताकि मरीज को तुरंत डॉक्टर मुहैया कराया जाये लेकिन रेल्वे के मेडि‍कल हेलप लाईन नंबर 138 पर बेल जाती रही और किसी भी करमचारी ने रिसीव करना मुनासिब नही समझा. ट्रेन के मुसाफिरों का कहना था कि रेल्वे के कर्मचारी यात्री मरे तो मरे रेलमंत्री को क्या फिक्र. और तो और रेलमंत्री के हेलप लाईन को टी टी ने बहुत बेकार बताते हुए कहा कि कोई मरता मर जाये लेकिन ये फोन नही रिसीव करते, वाह रे अच्छे दिन.

मेडिकल की सेकेंड ईयर की छात्रा मृगाकक्षी मध्य प्रदेश के होम्योपैथी अनु श्री मेडिकल कॉलेज कालेज से पढ़ाई कर रही है, रक्षा बधंन के लिए जबलपुर से लखनऊ घर आ रही थी कि सतना स्टेशन के पहले ही उसकी तबीयत बिगड़ने लगी तो टी टी ने बोला आपको डाक्टर मुहैया कराया जायगा, वो फीस लेगा 250 या फिर 300 रूपए तो दर्द से कराह रही महिला ने कहा कि मुझे डाक्टर की तुरंत आवश्यकता है तो टी टी ने बताया कि सतना स्टेशन पर ही डॉक्टर मिलेगा, मरीज का रक्‍तचाप तेजी से घटने लगा. मेडिकल हेलप लाईन पर टी टी ने फोन किया. एक नही दो दो टी टी महिला के स्वास्थ्य को लेकर बेहद परेशान थे, हेलप मेडि‍कल लाईन पर सम्पर्क करते रहे. बेल जाती रही किसी ने फोन रिसीव करना उचित नही समझा.

इसके बाद इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स के चेयरमैन श्री परवीन कोमल को महिला पत्रकार श्रीमति पूनम पांडे ने सूचना दी तो चेयरमैन महोदय ने भी रेल मंत्री की दो ट्विटर आई डी और रेल्वे की अधिकारिक ट्विटर आई डी पर टयूट किया लेकिन कोई हल नही निकला टी टी ने खुद कहा कि रेल्वे की हेल्प लाइन किसी काम की नही कोई मरे तो मरे इनकी बला से. पूरी यात्रा के दौरान एक यात्री जो सफर कर रहे थे, वो खुद अपने पास उपलब्ध दवा देते रहे खाने के लिये लेकिन जबलपुर से लखनऊ तक कोई भी डाक्टर नही मिला. इस से जहां रेलवे में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया है वहाँ रेलवे द्वारा अपने मुंह मियां मिट्ठू बनने को लेकर भी यात्री चटखारे लेने लगे हैं.

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