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इस देश में सारे कानून कायदे व्यापारियों पर ही क्यों लागु किये जाते है ?

क्या व्यापारी सारी जिंदगी बंधुआ की तरह मुफ़्त में सरकार का टैक्स इकठा करके जमा करवाता रहेगा ?

लुधियाना (पी एन टी ब्युरो): वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) पर संविधान संशोधन बिल को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद देश भर में जीएसटी को लागू करने की राह आसान हो गई है। जीएसटी को इस दशक का सबसे अहम आर्थिक सुधार माना जा रहा है। जीएसटी लागू होने के बाद वस्तुओं और सेवाओं पर अलग-अलग लगने वाले सभी कर एक ही कर में समाहित हो जाएंगे। माननीय वित् मन्त्री जी ने जीएसटी पर सुझाव मांगे है । लुधियाना के एक व्यापारी परवीन गोयल ने जीएसटी पर अपने सुझाव दिए हैं जो सोशल मीडिया में काफ़ी वायरल हो रहे हैं ।जानिए क्या है वह सुझाव –

1. जीएसटी लागु होने के पश्चात् किसी भी स्टेट को अलग से कोई टैक्स लगाने का अधिकार नहीं होना चाहिए। जैसा कि कुछ स्टेटों ने अभी से एंट्री टैक्स अलग से लगाने की आवाज उठा दी है

2. जीएसटी की दर जो भी रखी जाए, उसमें पांच वर्ष से पहले संशोधन न हो, जैसा कि पिछले दो वर्षों में सर्विस टैक्स की दर 12% से बढ़ाकर 15% तक कर दी गई है ।

3. दर बढ़ाने का निर्णय पार्लियामेंट करे क्योंकि टैक्स की दर पुरे देश के लिये होगी । किसी अकेले मन्त्री को अपनी मनमर्जी से टैक्स बढ़ाने का अधिकार नहीँ होना चाहिये ।

4. टैक्स अदायगी में देरी होने पर या हिसाब किताब में गड़बड़ी पाये जाने पर व्यापारियों को पांच वर्ष की सजा का प्रावधान रखा गया है, जो कि सरासर ग़लत है । इससे व्यापारी भाइयों पर बहुत भारी मुसीबत आने वाली है । अफ़सर स्टॉक का पूरा हिसाब किताब मांगेगा । उदाहरण के तौर पर आपने पानी कितना पिया और पेशाब कितना किया । या तो अधिकारियों को खुश करो अन्यथा जेल जाओ । इस देश में सारे कानून कायदे व्यापारियों पर ही क्यों लागु किये जाते है जबकि व्यापारी की देश के योगदान में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है।व्यापारी टैक्स कोलेक्ट करता है, फिर उसका हिसाब रखता है और सरकार को टैक्स जमा करवाता है, फिर भी व्यापारी चोर कहलाता है । सरकारी अधिकारियों को साठ वर्ष बाद व् सांसदो, विधायकों को उनके निर्वत होने पर चाहे कोई भी ऊम्र हो, तुरन्त पैंसन मिलनी शुरू हो जाती है । एक व्यापारी जो सारी जिंदगी लोगों को रोजगार व् टैक्स देते देते बुढ़ा हो जाता है । उसके भविष्य व् रिटायरमेंट के बारे सरकारें क्यों नहीँ कानून बनाती । क्या व्यापारी सारी जिंदगी बंधुआ की तरह मुफ़्त में सरकार का टैक्स इकठा करके जमा करवाता रहेगा ? हर व्यापारी को उसके द्वारा जमा करवाए जीएसटी व् इनकम टैक्स पर 10% के हिसाब से कमीशन मिलना चाहिए, जो कि उनके अकाउन्ट में सीधा जमा हो जाए और पी. एफ. की भांति उस पर ब्याज मिलना चाहिए । यह अमाउंट इन्कम टैक्स से मुक्त हो, ताकि इस राशि का उपयोग वह अपने रिटायरमेंट के बाद या व्यापार कार्य छोड़ने के उपरान्त पैंशन के तौर पर इस्तेमाल कर सके ।व्यापारी वर्ग न तो सरकार से आरक्षण मांग रहा है और न ही कोई सब्सिडी । लेकिन रिटायरमेंट के बाद सम्मान से जीने का अधिकार तो उसे भी मिलना चाहिए ।

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