Loading...

अलविदा 2017: परीक्षाओं में हुए बड़े बदलावों का गवाह रहा ये वर्ष

इस वर्ष स्कूली व उच्च शिक्षा के स्तर पर किए गए कई बड़े बदलाव 

वर्ष 2017 शिक्षा के क्षेत्र में आए कई बड़े बदलावों का गवाह रहा। स्कूली व उच्च शिक्षा के स्तर पर इस वर्ष कई बड़े बदलाव किए गए। कई परीक्षाओं की मार्किंग स्कीम में बदलाव करने का निर्णय किया गया तो किसी के पासिंग मार्क्स घटाए गए। कुछ परीक्षाओं को साल में दो से घटाकर एक बार या एक से बढ़ाकर दो बार करने की मांग की गई। यहां

1. राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा में अब नहीं होगी निगेटिव मार्किंग
राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने 2018 मई में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा (एनटीएस) स्तर दो की परीक्षा की रुपरेखा में बदलाव किये। अब एनटीएस स्तर दो परीक्षा में तीन की बजाय दो पत्र होंगे और नकारात्मक अंक का प्रावधान नहीं रहेगा। एनटीएस स्तर दो के परिवर्तित प्रारुप के अनुसार, अब इस परीक्षा में तीन पत्रों की बजाय दो पत्र होंगे। इसमें भाषा परीक्षा के पत्र को समाप्त कर दिया गया है।

2. ICSE-ISC में पासिंग मार्क्स को लेकर बड़ा बदलाव
CISCE बोर्ड ने ICSE-ISC में विभिन्न विषय के पासिंग मार्क्स को लेकर बड़ा बदलाव किया। यह बदलाव अगले सत्र यानी वर्ष 2019 से लागू होंगे। नए बदलाव के तहत अब दसवीं और बारहवीं की परीक्षा देने वाले छात्रों को बोर्ड में पास होने के लिए प्रत्येक विषय में 33 और 35 फीसदी अंक लाने होंगे। पहले उन्हें 35 और 40 फीसदी अंक लाना होता था।
बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक उन्होंने यह बदलाव मंत्रालय के उस सुझाव को ध्यान में रखते हुए किया, जिसके तहत देशभर के बोर्ड में पासिंग मार्क्स एक रखने को कहा गया।  इसके साथ ही अब 09वीं और 11वीं कक्षा के विषयों में भी पासिंग मार्क्स 33 और 35 फीसदी कर दिया है।

3. परीक्षाओं में आधार कार्ड अनिवार्य
विभिन्न बोर्ड परीक्षाओं व प्रवेश परीक्षाओं में आधार कार्ड को अनिवार्य करने का निर्णय किया गया। आदेश दिया गया कि छात्र-छात्राओं को प्रवेश पत्र के साथ आधार कार्ड लाना अनिवार्य होगा। इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन (जेईई) मेन 2018, में आधार कार्ड अनिवार्य किया गया है।  इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन (जेईई) मेन 2018 में इस बार आधार कार्डके बिना ऑनलाइन आवेदन नहीं कर पाएंगे। इसके अलावा यूजीसी नेट के लिए भी आधार कार्ड को अनिवार्य किया गया है।

4. अगले साल से उर्दू में भी होगी NEET परीक्षा
NEET परीक्षा उर्दू में भी देने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और CBSE को 2018-19 से उर्दू को शामिल करने को कहा। अभी तक नीट की परीक्षा हिंदी, इंग्लिश, गुजराती, मराठी, उड़िया, बंगला, असमी, तेलगु, तमिल और कन्नड़ में होती है।

5. सभी भाषाओं में एक जैसा होगा नीट प्रश्न पत्र
नीट पर सुप्रीम कोर्ट ने एक और अहम आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि नीट परीक्षाओं के लिए प्रश्न पत्र एक समान तैयार किया जाना चाहिए। इसके बाद सरकार ने ऐलान किया कि अगले साल से देश भर में होने वाला नीट के पेपर एक जैसे होंगे। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रीय भाषाओं के लिए नीट के क्वेस्चन सेट अलग-अलग नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि अन्य भाषाओं में नीट के क्वेस्चन पेपर्स सिर्फ इंग्लिश वाले पेपर का अनुवाद होगा।

6. CBSE 10वीं बोर्ड के लिए 6 विषय, वोकेश्नल सब्जेक्ट हुआ अनिवार्य
अगले साल CBSE की कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो अब आपको पांच की जगह 6 विषय पढ़ने होंगे। CBSE ने अपनी परीक्षा प्रणाली में परिवर्तन किया है। जहां 10वीं की बोर्ड परीक्षा के लिए छात्रों को पांच विषय- दो भाषा, सोशल साइंस, गणित और विज्ञान पढ़ना पड़ता था। हालांकि उन्हें एक अतिरिक्त वोकेश्नल विषय पढ़ने का विकल्प भी था। CBSE के मुताबिक अब 2017-18 की परीक्षा में एक वोकेश्नल विषय अनिवार्य हो जाएगा।

7. 10वीं में बोर्ड परीक्षा अनिवार्य
पिछले कुछ सालों से सीबीएसई में 10वीं में बोर्ड परीक्षा समाप्त कर दी गई थी। लेकिन अब 10वीं के लिए बोर्ड परीक्षा फिर से अनिवार्य कर दी गई है। यह भी तय किया गया है कि परीक्षा के नतीजों में 80 फीसद अंक तो बोर्ड परीक्षा में प्रदर्श के मुताबिक और बाकी के 20 फीसद अंक आंतरिक समीक्षा के ऊपर दिए जाएंगे।

8. 25 वर्ष नीट देने की अधिकतम सीमा 
NEET परीक्षा में CBSE ने बड़ा बदलाव करते हुए उम्र की सीमा के साथ-साथ प्रयासों की संख्या तय कर दी है।
नए फैसले के मुताबिक अब सिर्फ 17 से 25 साल तक के छात्र ही परीक्षा में शामिल हो पाएंगे। साथ ही अब छात्र तीन बार ही परीक्षा दे पाएंगे। बदलाव के अनुसार, सामान्य श्रेणी के छात्र जो 25 वर्ष तक की उम्र के हैं, सिर्फ वहीं परीक्षा दे सकते हैं। साथ ही 17 से 25 वर्ष तक में सामान्य श्रेणी के छात्र सिर्फ 3 बार परीक्षा देंगे। अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों को पांच साल की छूट दिए जाने के साथ वो 30 साल तक परीक्षा दे सकेंगे लेकिन उन्हें भी परीक्षा सिर्फ 3 बार ही देनी है। हालांकि परीक्षा के अवसरों की संख्या बढ़ सकती है। इसे तीन से बढ़ाकर आठ किए जाने का प्रस्ताव है।

9. नर्सरी एडमिशन में नहीं होगी कोई अपर एज लिमिट
नर्सरी एडमिशन के तहत  पहली बार बच्चों के लिए कोई भी अपर एज लिमिट तय नहीं की गई है। डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन (डीओई) ने इस नियम को इस साल से खत्म कर दिया है। डीओई के अनुसार इस साल नर्सरी, केजी और क्लास वन में दाखिले लेने जा रहे बच्चों की 31 मार्च 2018 तक लोअर एज लिमिट तीन, चार और पांच साल होनी चाहिए। गौरतलब है कि 2015 में दिल्ली सरकार ने नर्सरी दाखिले के तहत बच्चों की अपर एज लिमिट को हटाने की पहल की थी।

10. अब स्कूल परिसरों में निजी प्रकाशकों की किताबों की बिक्री नहीं होगी
सीबीएसई ने आदेश दिया कि स्कूल परिसरों में निजी प्रकाशकों की किताबों की बिक्री अब नहीं होगी। बोर्ड ने स्कूलों को एक पत्र में कहा है, ‘स्कूल अपने परिसरों में केवल एनसीईआरटी की किताबें और स्टेशनरी सामग्री बेचने के लिए छोटी दुकान खोल सकते हैं। उन्हें निजी प्रकाशकों की कोई भी किताब बेचने की अनुमति नहीं होगी।’

Newsletter

Get our products/news earlier than others, let’s get in touch.